Tuesday, April 23, 2019

斯里兰卡连环爆炸:当局指施袭者有外国联系

斯里兰卡连环爆炸案发生至今,当地警方指死亡人数已经上升到290人,大约500人受伤, 死者中包括最少35名外国人。中国官方新华社引述中国驻当地大使馆消息,把遇害中国公民数字修正为一人。

斯里兰卡当局已经逮捕了24人。内阁发言人塞纳拉特纳(Rajitha Senaratne)指出,当局目前怀疑袭击由一个称为全国认主学大会组织(National Thowheeth Jama'ath,简称NTJ)的激进穆斯林组织发动,而且牵涉一个“国际网络”。

中国外交部发言人耿爽周一(4月22日)确认有5名中国公民在袭击中受伤,但无生命危险,另外有5名中国人失去联络。台湾媒体报道指出,一名台湾人疏散期间被玻璃割伤。

斯里兰卡当地时间周日(4月21日)共发生8起爆炸案,分布于首都科伦坡、附近的尼甘布以及东部拜蒂克洛,涉及3个教堂及4家酒店。遇袭教堂当时正举行复活节主日崇拜。教堂内天花被破坏、堆满瓦砾、布满血迹,亦有人流血倒卧地上。

政府在周日凌晨实施宵禁后宣布,于当地时间周一晚上8时(即北京时间晚上10时30分)再次实施宵禁,直至当地时间周二(4月23日)早上4时。

另外,斯里兰卡当局发出声明预告,将于周一午夜(即北京时间周二早上2时30分)宣布全国进入紧急状态。声明又指措施将有助当局“保障公众安全”,不会影响言论自由。

当地警方至今在全国多地调查事件,但没有公布被捕24人的资料。BBC僧加罗语记者阿扎姆‧阿明(Azzam Ameen)引述政府消息说,当局认为这些人都是一个“激进伊斯兰组织”的成员。

法新社报道,斯里兰卡警察总长在爆炸发生10天前,曾经收到可能自杀袭击的警告。情报警告透露,激进穆斯林组织NTJ计划袭击著名教堂和印度驻斯里兰卡高级专员公署。NTJ去年开始让人关注,因为组织被指涉及破坏当地佛像。斯里兰卡与印度同为英联邦(大英国协)成员,英联邦成员国之间不互设大使馆,改设高级专员公署。

斯里兰卡总理维克勒马辛哈(Ranil Wickremesinghe)之后接受访问时指出,当局必须查清为什么相关部门“没有采取适当防范”。

但总统幕僚长费尔南多(Hemasari Fernando)解释,当局收到的情报只有指出“一两宗袭击”,完全没有预计袭击规模如此巨大。

BBC僧加罗语记者阿扎姆‧阿明周日发生爆炸后,赶到科伦坡出事的教堂现场报道。他说,起初有传言指,可能会有更多袭击,警方呼吁人们留在家中。现在,主要国家机构及大厦有军人在场戒备,这原本是一个和平的周日上午,许多人也在参与复活节的活动,没有人预计到会有这宗袭击。

科伦坡总主教马尔科姆‧兰吉特枢机(Malcolm Ranjith)对BBC表示,教堂没有很多安全设施,因为从来没有想过教堂会发生这样的事情。他呼吁政府作不偏不倚的调查,惩罚行凶者,他形容只有动物会做出如此行径。

印度总理莫迪、澳洲总理莫里森、英国首相特蕾莎‧梅等国家领袖和政客均谴责袭击。

斯里兰卡曾经经历长达20多年的内战,泰米尔伊拉姆猛虎解放组织领导人在2009年被击毙后,斯里兰卡宣布内战结束。这场内战占计造成7万至8万人死亡。

BBC南亚事务编辑安巴拉桑·埃瑟拉疆(Anbarasan Ethirajan)表示,复活节是当地最繁忙的节日,这宗袭击选择的时间和目标,都是想做到最大的破坏。其中一间教堂所在地,是东部的拜蒂克洛,那儿是内战时期,反对派泰米尔武装的重地。自从2009年起,斯里兰卡大致上是和平,过往斯里兰卡都有发生种族冲突,但这是首次这么多所教堂同时成为遇袭目标。

Wednesday, April 17, 2019

क्या मोदी को चाहते हैं विदेशों में बसे भारतीय?

90 करोड़ भारतीय इस चुनाव में मतदान करने के क़ाबिल हैं. इस बार भारत भर में 39 दिनों में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो रही है. 11 अप्रैल से शुरू हुआ मतदान सात चरणों में होगा और 19 मई तक चलेगा.

इसी चुनाव में मतदाता यह फ़ैसला करेंगे कि हिन्दू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र मोदी ही फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे या फिर कोई और नेता इस गद्दी पर विराजमान होंगे.

2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद मतदाता सूची में 8.3 करोड़ नए मतदाता जोड़े गए हैं. इस चुनाव में 18 से 19 साल के 1.5 करोड़ लोग वोट देने के योग्य हैं.

दिसंबर में हुए तीन राज्यों के चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी की हार के बाद नरेंद्र मोदी के एक बार फिर पीएम बनने को लेकर पार्टी के भीतर भी आत्मविश्वास डोलता दिख रहा है.

भारत में चुनाव प्रचार अभी शिखर पर हैं और हर बार की तरह इस बार भी दुनियाभर के भारतवंशी इस चुनाव में फ्रंटफुट पर हैं.

ब्रिटेन में भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में हैं और चुनाव को लेकर यहां के प्रवासियों में भी काफ़ी उथल-पुथल है. ये लोग सड़कों पर निकल रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी कैंपेन का हिस्सा बन रहे हैं.

द नेशनल इंडियन स्टूडेंट्स एंड एलुम्नी यूनियन यूके (एनआईएसएयू) भारत में चुनाव को लेकर काफ़ी सक्रिय है. यह ब्रिटेन में भारतीय मूल के युवाओं का संगठन है. इन्हें लगता है कि भारत के आम चुनावों में इनकी बड़ी भूमिका है.

एनआईएसएयू की चेयरमैन सनम अरोड़ा का कहना है कि इस बार उम्मीद से कहीं ज़्यादा लोग भारत में वोट करने जा रहे हैं.

सनम अरोड़ा ने कहा, "लोग न केवल वोट देने जा रहे हैं बल्कि ज़मीन पर चुनाव प्रचार में भी शामिल हैं. भारतीय छात्रों में इस चुनाव को लेकर काफ़ी गहमागहमी है."

आम चुनाव से पहले एआईएसएयू ने भारत से बाहर रह रहे छात्रों की मांगों और चिंताओं को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी. इसमें अहम मुद्दा दोहरी नागरिकता, भारतीय संसद में प्रतिनिधित्व और भारत से बाहर मताधिकार की मांगें शामिल हैं.

मतलब यह साफ़ है कि भारतीय मूल के लोग विदेशी नागरिकता हासिल करने के बाद भी अपनी मिट्टी से संपर्क ख़त्म नहीं होने देना चाहते और भारत की सत्ता किसके हाथ में होगी इसमें काफ़ी दिलचस्पी रखते हैं.

हालांकि नॉन रेजिडेंट इंडियंस यानी एनआरआई जिनके पास भारतीय पासपोर्ट हैं लेकिन वो विदेशों में रहते हैं उन्हें भारत में वोट करने का अधिकार है. एनआरआई के लिए प्रॉक्सी वोटिंग जैसी व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है.

भारतीय चुनावों के मतदान में भारतीय प्रवासियों के मतदान का प्रतिशत अब भी बहुत छोटा है. इसके बावजूद भारतीय प्रवासियों का भारत की राजनीति में बड़ा दख़ल है.

अमोघ शर्मा ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ इंटरनेशनल डेवलपमेंट में भारत की राजनीतिक पार्टियां और चुनावी कैंपेन पर रिसर्च कर रहे हैं. उन्होंने द डिप्लोमैट से कहा है कि भारतीय प्रवासी चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

शर्मा कहते हैं, "हालांकि यह कहना थोड़ी अतिशयोक्ति होगी कि भारतीय प्रवासी भारतीय मतदाताओं की सोच बदल सकते हैं. मेरा मानना है कि ज़मीन पर जो ट्रेंड है उसे वो और हवा भले दे सकते हैं."

अमोघ शर्मा कहते हैं कि "भारतीय प्रवासी, भारत में चुनाव के वक़्त अलग-अलग तरह की भूमिका अदा कर रहे हैं. इनमें राजनीतिक पार्टियों के लिए पैसे जुटाना, चुनावी अभियान में तकनीकी पक्ष को मज़बूत करना, ज़मीन पर जाकर किसी सियासी पार्टी के पक्ष में अभियान चलाना और लॉबीन्ग करना है. मतलब ये किसी भी पार्टी की जीत में एक अहम टूल का काम करते हैं."

इनग्रिड थरवाथ ने राजनीति विज्ञान में पीएचडी की है. वो पिछले कई सालों से भारतीय प्रवासियों पर स्टडी कर रही हैं. वो कहती हैं कि वेम्बली स्टेडियम और मेडिसन स्क्वेयर में भारतीय प्रवासियों की भीड़ देख अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इनका भारतीय राजनीति में कितना प्रभाव है.

वो कहती हैं, "विदेशों में बसे भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में हैं. पिछले 20 सालों में भारत सरकार और भारत के दक्षिणपंथी सियासी ग्रुपों ने इन प्रवासियों से रिश्ते गहरे करने के लिए बहुत कुछ किया है. ब्रिटेन में हिन्दू प्रवासियों के साथ इन्होंने अच्छे संबंध बनाए हैं."

द डिप्लोमैट की रिपोर्ट के अनुसार 2019 के चुनाव में बीजेपी ने ब्रिटेन के 2000 भारतीय प्रवासियों को भारत में बुलाया है ताकि वो पार्टी के चुनावी अभियान में हिस्सा ले सकें.

इनग्रिड कहती हैं, "1975 में भारत में जब आपातकाल लगा तो आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इसी दौरान आरएसएस ने देश के बाहर ख़ुद को फैलाना शुरू किया. 1998 में बीजेपी सत्ता में आई और उसी दौरान बीजेपी ने वैश्विक स्तर पर अपना नेटवर्क मज़बूत किया. ख़ास करके ब्रिटेन और अमरीका में."

अमोघ शर्मा कहते हैं, "बीजेपी ने मज़बूत राष्ट्र बनाने का वादा किया और सुशासन लाने की बात कही. बीजेपी ने कहा कि वो भारत को विश्व स्तर का देश बनाएगी. विदेशों में बसे भारतीयों को ये वादे पसंद आए. उन्हें लगा कि जहां उनका जन्म हुआ है और अभी वो जहां रह रहे हैं उसमें बराबरी आएगी."

कई लोग मानते हैं कि भारतीय प्रवासियों के बीच मोदी ने अपनी पकड़ मज़बूत की है. इनग्रिड कहती हैं, "मोदी ने इस चीज़ को ज़ोर-शोर से प्रचारित किया कि भारत एक मज़बूत देश है और भारतीय होना गर्व की बात है. भारतवंशियों में ऊंची जातियों के मध्य वर्ग को मोदी की बातें रास आईं. अगर आप मोदी समर्थक एनआरआई को देखें तो पता चलता है कि सभी ऊंची जाति के हिन्दू हैं."

भारत में राजनीतिक पार्टियों के लिए इनका समर्थन काफ़ी अहम है. इनसे वित्तीय और तकनीकी मदद का मिलना किसी भी पार्टी की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जाता है. कई लोग मानते हैं कि बीजेपी ने दुनिया भर में बसे भारतवंशियों की इस ताक़त को पहले पहचान लिया था.

भारतीय प्रवासियों में विपक्षी आवाज़
ऐसा नहीं है कि विदेशों में बसे भारतीयों के बीच सारी आवाज़ मोदी के समर्थन में है. यहां मोदी विरोधी आवाज़ भी है. इनग्रिड और अमोघ शर्मा दोनों का मानना है कि भारतीय प्रवासियों के बीच कोई एक आवाज़ नहीं है.

अमोघ शर्मा ने द डिप्लोमैट से कहा है, "भारतीय प्रवासी बीजेपी को पसंद करते हैं लेकिन मोदी विरोधी आवाज़ भी कमज़ोर नहीं रही है. बीजेपी के समर्थन के साथ मोदी विरोधी आवाज़ भी हमेशा से मज़बूत रही है. ये सच है कि मोदी समर्थक से कम मोदी विरोधी हैं लेकिन विरोधी आवाज़ भी प्रभावकारी है."

भारत में पहले चरण के मतदान से पहले लंदन में भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारी जुटे और उन्होंने मोदी सरकार में अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर विरोध किया. इसका आयोजन साउथ सॉलिडिरेटी ग्रुप, एसओएएस यूनिवर्सिटी इंडिया सोसाइटी और दलित अधिकार ग्रुपों ने किया था.

Wednesday, April 10, 2019

91 सीटों पर मतदान कल, पिछली बार भाजपा ने इनमें से 35% और कांग्रेस ने 8% सीटें जीती थीं

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के पहले चरण के तहत 18 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 91 लोकसभा सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान होगा। भाजपा ने 2014 में इन 91 में से 35% यानी 32 सीटें जीती थीं। वहीं, कांग्रेस ने 8% यानी 7 सीटें ही जीती थीं। पहले चरण में 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सभी 55 सीटों पर मतदान होना है। वहीं, 10 अन्य राज्यों की 36 सीटों पर वोट डाल जाएंगे।

इन 91 सीटों पर पिछले दो चुनावों की स्थिति
2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन 91 में से 7 और कांग्रेस ने 55 सीटें जीती थीं। 2014 में यह तस्वीर बदल गई। कांग्रेस 7 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को 25 सीटों का फायदा हुआ और वह 32 के आंकड़े तक पहुंच गई। पहले चरण की इन 91 सीटों पर पिछली बार कांग्रेस से ज्यादा सफल तेदेपा (16) और टीआरएस (11) रही थी।

मोदी ने देर से प्रचार शुरू किया, राहुल ने उनसे 9 रैलियां ज्यादा कीं
लोकसभा चुनाव की घोषणा 10 मार्च को हुई थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अगले दिन यानी 11 मार्च से ही प्रचार शुरू कर दिया था। उन्होंने कांग्रेस के ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच पहली रैली की थी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव की घोषणा के 10 दिन बाद 20 मार्च से प्रचार शुरू किया था। तब उन्होंने ‘मैं भी चौकीदार’ कैम्पेन की लॉन्चिंग के बाद देशभर में 25 लाख सिक्युरिटी गार्ड्स को ऑडियो-वीडियो के जरिए संबोधित किया था। 9 अप्रैल तक मोदी ने 30 रैलियां कीं। वहीं, राहुल ने 39 रैलियों को संबोधित किया।

सबसे दिलचस्प मुकाबला तेलंगाना की चेवेल्ला सीट पर
पहले चरण में सबसे अमीर और सबसे गरीब प्रत्याशी तेलंगाना की चेवेल्ला सीट पर ही चुनाव लड़ रहा है। अपने हलफनामे में कांग्रेस के कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने अपनी संपत्ति 895 करोड़ रुपए बताई है। इसी सीट पर प्रेम जनता पार्टी के नल्ला प्रेम कुमार भी चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 500 रुपए घोषित की है।

पहले चरण में 44 टिकट उद्योगपतियों-कारोबारियों को
पहले चरण की 91 सीटों पर 182 प्रमुख उम्मीदवार हैं। इनमें सबसे ज्यादा 44 प्रत्याशी उद्योगपति-कारोबारी हैं। इसकी बड़ी वजह है आंध्र की 25 सीटों पर वोटिंग। अकेले आंध्र में तेदेपा ने 11 और वाईएसआरसी ने 10 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं जो बड़े उद्योगपति या कारोबारी हैं। 182 प्रमुख उम्मीदवारों में 38 टिकट नेताओं के परिवार में बंटे हैं। इनमें भाजपा ने 5 और कांग्रेस ने 4 टिकट परिवारवाद के आधार पर दिए हैं।

Monday, April 1, 2019

निजी कंपनियों के कर्मचारियों की पेंशन बढ़ाने का रास्ता साफ़ः प्रेस रिव्यू

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने निजी कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों की पेंशन में बढ़ोत्तरी का रास्ता साफ़ कर दिया है. ईपीएफ़ओ ने केरल हाई कोर्ट के एक फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे ख़ारिज कर दिया गया है. हाई कोर्ट ने ईपीएफ़ओ को रिटायर हो रहे सभी कर्मचारियों को उनके कुल वेतन के आधार पर पेंशन देने का आदेश दिया था.

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सीमा पर एक पाकिस्तानी ड्रोन दिखने के बाद भारत ने अपने दो सुखोई एसयू-30 लड़ाकू विमानों को तुरंत हवा में उड़ाया. इसके तुरंत बाद पाकिस्तान ने भी अपने एफ़-16 लांच कर दिए. हालांकि भारत और पाकिस्तान के विमानों ने एक-दूसरे के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया. भारत ने बालाकोट में हवाई कार्रवाई के बाद से कई पाकिस्तानी ड्रोन विमानों को मार गिराने का दावा भी किया है.

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर से 8 बार से सांसद और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की लोकसभा चुनाव में दावेदारी पर बीजेपी अभी कोई फ़ैसला नहीं ले सकी है. इंतेज़ार से आहत सुमित्रा प्रधानमंत्री के मै भी चौकीदार हूं अभियान के तहत इंदौर में हुए कार्यक्रम में भी नहीं पहुंची. उन्होंने अभी ट्विटर पर अपने नाम के साथ चौकीदार भी नहीं लगाया है. सुमित्रा महाजन अगले महीने 76 साल की हो जाएंगी. यानी वो पार्टी की 75 साल की लाल रेखा को भी पार कर लेंगी. मध्यप्रदेश की इंदौर सीट पर 19 मई को चुनाव होना है. बीजेपी प्रदेश की 29 में से 18 सीटों पर उम्मीदवार भी घोषित कर चुकी है ऐसे में सुमित्रा महाजन का टिकट अभी घोषित न किए जाने से उनकी उम्मीदवारी पर संदेह पैदा हुआ है. कांग्रेस ने भी अभी इंदौर सीट से उम्मीदवार घोषित नहीं किया है.

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी की जीत की अपील करके चुनाव आयोग की आचार संहिता का उल्लंघन किया है. 23 मार्च को अलीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कल्याण सिंह ने कहा था कि सभी चाहतें हैं कि मोदी जीतें और यही देश के लिए ज़रूरी भी है. रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने पाया है कि कल्याण सिंह ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है. चुनाव आयोग अब इस विषय में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को पत्र लिखेगा.

बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती का भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर को बीजेपी का एजेंट बताना और फिर चंद्रशेखर का मायावती पर पलटवार करना एक नई राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है.

राजनीतिक जगत में इसे दो तरीक़े से देखा जा रहा है- दलितों के बीच चंद्रशेखर के बढ़ते प्रभाव से मायावती का परेशान होना और चंद्रशेखर का समय से पहले बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पाल लेना.

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर दो साल पहले उस वक़्त चर्चा में आए थे जब सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में जातीय हिंसा हुई थी. उस समय उनका संगठन भीम आर्मी और उसका स्लोगन 'द ग्रेट चमार' भी ख़बरों में छाया रहा.

हिंसा के आरोप में चंद्रशेखर समेत भीम आर्मी के कई सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया था और उस वक़्त ये मामला भी काफ़ी सुर्ख़ियों में रहा कि बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने दलितों के साथ हुई हिंसा पर संवेदना जताने में काफ़ी देर की. बहुजन समाज पार्टी ने इसके ख़िलाफ़ कोई आंदोलन भी नहीं किया.

मायावती शब्बीरपुर गईं ज़रूर लेकिन हिंसा के कई दिन बाद. उस समय भी उन्होंने दलित समुदाय को भीम आर्मी जैसे संगठनों से सावधान रहने की हिदायत दी थी. मायावती ने उस वक़्त भी भीम आर्मी और चंद्रशेखर को बीजेपी का 'प्रॉडक्ट' बताया था.

उसके बाद चंद्रशेखर जब कभी भी सुर्खियों में रहे, मायावती ने या तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और दी भी तो चंद्रशेखर को अपना प्रतिद्वंद्वी समझकर. हालांकि जेल से छूटकर आने के बाद चंद्रशेखर ने सीधे तौर पर कहा था कि वो बहुजन समाज पार्टी और उसकी नेता मायावती के समर्थन में हैं और उन्हें प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं.

भीम आर्मी ख़ुद को एक सामाजिक संगठन के तौर पर पेश करता है और उसके प्रमुख चंद्रशेखर कई बार ख़ुद कह चुके हैं कि उनका राजनीति में आने का अभी कोई मक़सद नहीं है.

लेकिन वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की उनकी घोषणा से ये तो साफ़ हो गया कि भीम आर्मी एक राजनीतिक दल में अभी भले न तब्दील हो लेकिन चंद्रशेखर की राजनीतिक महत्वाकांक्षा से इनकार नहीं किया जा सकता.

जानकारों के मुताबिक़, चंद्रशेखर के राजनीति में आने से सबसे ज़्यादा ख़तरा बहुजन समाज पार्टी को दिखता रहा है क्योंकि जिस दलित समुदाय को बीएसपी अपना मज़बूत वोट बैंक मानती है, चंद्रशेखर और उनकी भीम आर्मी भी उसी समुदाय के हित में काम करते हैं.

企业复工复产插上科技翅膀:万物上云,新业态层出不穷

  中新网客户端北京4月20日电(记者 吴涛)一 4月中旬, 色情性&肛交集合 全球多个疫苗团队 色情性&肛交集合 宣布取得进展的同时, 色情性&肛交集合 中国宣布第一波疫情已经得到控制, 色情性&肛交集合 中国在全球的新冠研究 色情性&肛交集合 的临床试验立项占比从 色情性&...