Tuesday, March 26, 2019

习近平同法国总统马克龙会谈

  中新社巴黎3月25日电 (记者 郭金超 李洋)中国国家主席习近平当地时间25日在巴黎爱丽舍宫同法国总统马克龙会谈。两国元首一致同意,承前启后,继往开来,在新的历史起点上打造更加坚实、稳固、富有活力的中法全面战略伙伴关系。

  习近平指出,国际形势发生了很大变化,但中法关系始终保持高水平健康稳定发展。总统先生就任以来,两国关系在不到两年时间里又迈上了新台阶,取得很多新成果。今年是一个具有特殊纪念意义的年份,既是中法建交55周年和中国留法勤工俭学运动100周年,也是新中国成立70周年。知古可以鉴今,为了更好前行。当今世界正经历百年未有之大变局,人类处在何去何从的十字路口,中国、法国、欧洲也都处于自身发展关键阶段。中方愿同法方一道,传承历史,开创未来,使紧密持久的中法全面战略伙伴关系继续走在时代前列,共同为建设一个持久和平、普遍安全、共同繁荣、开放包容、清洁美丽的世界作出更多历史性贡献。

  习近平强调,要把中法关系发展好,政治互信是关键,务实合作是必由之路,国民感情是基础。新形势下,中法双方在这3方面要做得更好,要继续探索独立自主、相互理解、高瞻远瞩、互利共赢的大国相处之道。政治上,既要筑牢互信的“堤坝”,也要竖立理想的“灯塔”。要深化全方位、多层次沟通交流,充分发挥各个机制性对话作用,密切政府、立法机构、政党、军队间交流。要坚持尊重和照顾彼此核心利益和重大关切,和而不同、求同存异。要加强在联合国、二十国集团等多边机构中的合作,密切在气候变化等重大国际问题上的沟通和协调,推动落实《巴黎协定》和联合国2030年可持续发展议程,以实际行动维护以联合国宪章宗旨和原则为基础的国际关系基本准则和多边贸易体制。

  习近平指出,在务实合作方面,中法既要深挖市场的“源头活水”,也要疏浚政策的“河道沟渠”。双方要深化核能、航空、航天等传统领域合作,加快科技创新、农业、金融、养老服务等新兴领域合作步伐。我们赞赏总统先生多次表达同中方开展“一带一路”务实合作的意愿,双方要落实好“一带一路”第三方市场合作示范项目。要为双边贸易与投资提供更多支持和便利。我们刚刚颁布了《外商投资法》,将继续大幅放宽市场准入,优化营商环境,加强知识产权保护,打造高水平对外开放新格局。我们欢迎更多法国企业赴华投资兴业,也希望法方为中国企业在法投资提供公平、开放、非歧视待遇

  习近平强调,中法在人文交流方面,既要畅通政府间合作的“主渠道”,也要丰富民间交往的“涓涓细流”。要充分发挥中法高级别人文交流机制的统筹协调作用,加强文化、旅游、语言、青年、地方等领域合作,共同办好中法建交55周年和中国留法勤工俭学运动100周年纪念活动,在2021年互办中法文化旅游年。

  习近平指出,中国和欧盟是当今世界两大力量、两大市场、两大文明。中国重视欧洲战略地位和作用,一直将深化对欧关系作为外交优先方向。中方支持法方在欧洲联合自强进程中继续发挥引领作用。希望法方推动欧盟在发展对华关系方面发挥更积极影响。希望双方加快推进中欧投资协定谈判,尽早启动中欧自由贸易区联合可行性研究。

  马克龙表示,法中建交55年来,双方始终相互尊重,这使得我们可以开展富有成效的广泛合作。法中全面战略伙伴关系的基调是合作,法国祝贺中华人民共和国成立70周年取得的巨大成就,致力于成为中国可靠和明确的战略伙伴,愿同中国一道,建设一个平衡、稳定、安全、繁荣的世界。法方对法中关系的未来充满信心。法方愿同中方加强航空、航天、核能、农业、金融、科研、汽车制造、养老服务等领域合作,对接法国“未来工业计划”和“中国制造2025”。法方愿积极参加第二届“一带一路”国际合作高峰论坛和第二届中国国际进口博览会。法国支持大力促进两国教育、文化、体育、旅游以及军事防务方面的交流合作。

  马克龙表示,法方高度评价中国在应对气候变化以及维和等多边议程中的重要引领作用。法方不接受保护主义。法中在国际事务中有很多共同主张,保持着密切沟通协调。法中、欧中可以合作推进更多国际议程,完善全球治理体系,维护多边主义和自由贸易。法国愿积极推动欧中合作关系不断向前发展,主张加强欧盟互联互通战略同“一带一路”倡议对接。

Wednesday, March 20, 2019

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कैम्प में पहुंचे सुनील छेत्री, विराट ने स्वागत किया

खेल डेस्क. अब तक एक बार भी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की चैम्पियन नहीं बनी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की टीम अपने होमग्राउंड एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम पर पिछले कई दिनों से अभ्यास कर रही है। इसी दौरान मंगलवार को भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री आरसीबी के खिलाड़ियों से मिलने पहुंच गए। आरसीबी के कप्तान विराट कोहली ने उनका स्वागत किया और टीम के अन्य खिलाड़ियों से मिलाया।

विराट ने कहा- हम छेत्री का स्वागत करते हैं
विराट ने छेत्री का परिचय देते हुए ग्राउंड में कहा- जो लोग नहीं जानते हैं उन्हें मैं बताना चाहता हूं कि छेत्री हमारे राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कप्तान हैं। वे आज ही यहां आए हैं। आपने उनसे खेल को लेकर मानसिकता और किसी भी चीज के बारे में पूछ सकते हैं। हम छेत्री का स्वागत करते हैं।"

छेत्री ने कहा, "मैं आरसीबी का फैन हूं। आप सबों को आने वाले टूर्नामेंट के लिए शुभकामनाएं।" विराट ने छेत्री के साथ अपनी तस्वीर इंस्टाग्राम अकाउंट पर डाला। उन्होंने लिखा- बुधवार को आपके साथ खूब मजा आया कप्तान।

छेत्री ने रविवार को बेंगलुरु एफसी के लिए पहली बार इंडियन सुपर लीग का खिताब जीता। उनकी टीम ने एफसी गोवा को हराया। गोवा की फ्रैंचाइजी में कोहली का भी हिस्सा है। कोहली की टीम को 0-1 से हार का सामना करना पड़ा।

विराट की टीम अब तक आईपीएल खिताब नहीं जीत सकी है। टीम का पहला मुकाबला चेन्नई सुपरकिंग्स से 23 मार्च को चेन्नई के चेपक स्टेडियम में होगा। टीम में विराट को अलावा अनुभवी खिलाड़ी एबी डिविलियर्स, पार्थिव पटेल, युजवेंद्र चहल और उमेश यादव हैं।

गया के किसान सुरेश सिंह बताते हैं- रिकॉर्ड अपडेट ही नहीं है तो आवेदन खारिज होंगे ही। इसमें मोदी का क्या दोष। कसूर तो नीतीश का है। रिकॉर्ड अपडेट कराना तो राज्य का काम है। बहरहाल, इस वक्त राष्ट्रप्रेम के आगे सारे मुद्दे गायब दिखते हैं। लोग कहते हैं- पहली बार हमने पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मारा है। इंदिरा के बाद पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने ऐसी ताकत दिखाई है।

जमुई के लखन ठाकुर हों या गया की पटवा टोली के लोग..., सभी कहते हैं- इस बार दो ही खेमे हैं। एक तो खुद मोदी, दूसरे वे जो खिलाफ हैं। बता दें पटवा टोली बुनकरों का वह मोहल्ला है, जहां से सर्वाधिक संख्या में बच्चे आईआईटी क्लीयर करते हैं। कह सकते हैं यहां हर घर में एक इंजीनियर है।

समाजशास्त्री आरबी सिंह कहते हैं कि बिहार ऐसा राज्य है, जहां समस्याएं लाख हों, पर चुनाव जातियों के आधार पर ही लड़ा जाता है। यही यहां का राजनीति शास्त्र है। इसे समझाते हुए वे कहते हैं- देखिए चार में दो सीटें जमुई और गया सुरक्षित हैं। औरंगाबाद में तो 16 संसदीय चुनावों में 13 बार प्रतिनिधित्व दो परिवारों के बीच ही सिमटा रहा। यहां राजपूत ही जीतते रहे हैं।

आजादी के बाद हुए 16 चुनावों में 13 बार यह सीट सत्येन्द्र नारायण सिंह और रामनरेश सिंह के परिवारों के पास ही रही। इस बार भी दोनों के बेटों के बीच मुकाबला होगा। निखिल कुमार, सत्येन्द्र नारायण सिंह के पुत्र हैं तो सुशील कुमार सिंह, रामनरेश सिंह के पुत्र। वहीं परिसीमन के बाद सामान्य हुई नवादा सीट पर भूमिहारों की जीत का रिकॉर्ड है।

Thursday, March 7, 2019

आइए, हम मर्द आज महिलाओं से माफ़ी तो मांगें: ब्लॉग

हम मर्द मानें या न मानें मुहिम ने तमाम औरतों को हौसला और आवाज़ दी है. शायद तभी वे शर्म और कलंक के डर से जीतकर ख़ामोशी तोड़ने में कामयाब हो पाईं. सालों से दफ़्न अपनी तकलीफ़ को सबके सामने सिर उठाकर खुलकर ज़ाहिर कर पाईं.

इस तक़लीफ़ को हम आज यौन हिंसा या यौन उत्‍पीड़न के नाम से जानते हैं. मौजूदा वक़्त में इस हिंसा और उत्‍पीड़न से लड़ने और बचने के लिए कई अलग-अलग क़ानून हैं.

इनमें से ज़्यादातर जब किसी न किसी रूप में हिंसा झेल रही थीं, तब ऐसा कुछ नहीं था. इस तक़लीफ़ के लिए न शब्‍द थे और न क़ानून. यह बहनापा भी नहीं था. ज़्यादातर महिलाएँ इसे चुपचाप झेलती थीं. 'मीटू' के तहत आवाज़ उठाने वाली लड़कियां क़ाबिलदिमाग़ और हुनरमंद हैं.

बहुत सारी बाधाएं पार कर वो मर्दों से घिरी काम की दुनिया में अपनी क़ाबिलियत की वजह से ही पहुंची. ज़ाहिर है, इनमें से कई लड़कियाँ अपने ख़ानदान, इलाके और गाँव-कस्‍बे की पहली स्‍त्री थीं या हैं, जिन्‍होंने बाहरी दुनिया में काम करने के लिए कदम बढ़ाया.

इसलिए इनके सामने ढेर सारी चुनौतियां भी थीं/हैं. हर तरह की 'इज्‍ज़त' बचाने का भार था/है. हालात बदले, माहौल बदला, 'इज्‍ज़त का तमगा' जब बोझ बन गया तो दफ़्न तक़लीफ़ों को ज़ुबान मिल गयी. नतीजा, एक के बाद एक आवाज़ निकलती चली गयी. साथ से साथ मिलता गया. बोलने का हौसला बनता गया. यही बहनापा है.

हालांकि आज शब्‍द हैं, क़ानून हैं, बहनापा है फिर भी स्त्रियों की तक़लीफ़ों यह सिलसिला रुका नहीं है. ऐसा भी नहीं है कि ये तक़लीफ़देह हालात शहरों के बड़े दफ़्तरों, कॉलेजों या विश्‍वविद्यालयों तक ही सीमित है.

गांव-कस्‍बों और खेतों में जहां भी मेहनतकश महिलाएँ हैं, वहाँ ये दिख सकता है.

आवाज़ उठाने वालियों की दास्‍तानें बता रही हैं कि तक़लीफ़ों की फेहरिस्‍त कितनी लम्‍बी है और कितने तरह की है. इस फेहरिस्त में तक़लीफ़ देने वाले अल्‍फाज़ हैं, तस्‍वीरें हैं, बात है, बर्ताव है, रवैया है, सुलूक है, मज़ाक है, जोर-ज़बरदस्‍ती है, ताक़त का इस्‍तेमाल है, धमकी है, सज़ा है, दिमाग़ी तनाव है, स्‍त्री को अपनी जरख़रीद जायदाद बनाने और मनमर्ज़ी के मुताबिक़ इस्‍तेमाल करने का लालच है, कुछ लाभ देने के बदले बहुत कुछ पाने की इच्‍छा है, स्‍त्री की काबिलियत को नकारने का सदियों पुराना गुरूर है, उसे महज़ एक देह तक समेट देने वाला चरित्र है... वाक़ई फेहरिस्‍त लम्‍बी है. सबको यहाँ समेट पाना या अल्‍फाज़ में पिरो पाना मुश्‍किल है.

ऐसा नहीं था कि 'मी टू' से पहले स्त्रियों के साथ होने वाले धौंस वाले मर्दाना बर्ताव के बारे में पता नहीं था. (यह धौंस वाला मर्दाना ज़िंदगी के हर क्षेत्र में देखा जा सकता है) मगर इसके साथ ख़ामोशी का एक लबादा था.

बहुत सी औरतें चाहकर भी बोलने की हिम्‍मत नहीं कर पाती थीं.

बहुतों ने मान लिया कि उनकी ज़िंदगी का यह सच है और इसी सच के साथ ज़िंदगी गुजारनी है. दफ़्तरों और विश्‍वविद्यालयों या ऐसी ही किसी जगह में कभी-कभार इक्‍का-दुक्‍का आवाज़ उठी तो उन आवाज़ को भी दबाने की हर मुमकिन कोशि‍श की गई.

कई बार ऐसा भी लगा कि यह तो निहायत ही मामूली सी बात है. इस पर शिकायत क्‍यों? मगर वह निहायत ही मामूली सी बात मर्दों के लिए थी/ है. वह उन लड़कियों और स्‍त्र‍ियों के लिए कभी मामूली नहीं थी/ है, जिन्‍होंने उन मर्दाना रवैये को झेला.

वे मामूली सी बातें तो उनके लिए जहन्‍नम की आग से गुजरने जैसा था/ है. वे जहन्‍नमी रवैये को अब और ख़ामोशी से बर्दाश्‍त करने को तैयार नहीं हैं. हम यह नहीं कह सकते कि वे अब क्‍यों बोल रही हैं. वे सही नहीं बोल रही हैं. वे बोल रही हैं, हमें उन्‍हें गौर से सुनना होगा. संवाद बनाना होगा. समझना होगा.

企业复工复产插上科技翅膀:万物上云,新业态层出不穷

  中新网客户端北京4月20日电(记者 吴涛)一 4月中旬, 色情性&肛交集合 全球多个疫苗团队 色情性&肛交集合 宣布取得进展的同时, 色情性&肛交集合 中国宣布第一波疫情已经得到控制, 色情性&肛交集合 中国在全球的新冠研究 色情性&肛交集合 的临床试验立项占比从 色情性&...