Wednesday, March 20, 2019

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कैम्प में पहुंचे सुनील छेत्री, विराट ने स्वागत किया

खेल डेस्क. अब तक एक बार भी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की चैम्पियन नहीं बनी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की टीम अपने होमग्राउंड एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम पर पिछले कई दिनों से अभ्यास कर रही है। इसी दौरान मंगलवार को भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री आरसीबी के खिलाड़ियों से मिलने पहुंच गए। आरसीबी के कप्तान विराट कोहली ने उनका स्वागत किया और टीम के अन्य खिलाड़ियों से मिलाया।

विराट ने कहा- हम छेत्री का स्वागत करते हैं
विराट ने छेत्री का परिचय देते हुए ग्राउंड में कहा- जो लोग नहीं जानते हैं उन्हें मैं बताना चाहता हूं कि छेत्री हमारे राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कप्तान हैं। वे आज ही यहां आए हैं। आपने उनसे खेल को लेकर मानसिकता और किसी भी चीज के बारे में पूछ सकते हैं। हम छेत्री का स्वागत करते हैं।"

छेत्री ने कहा, "मैं आरसीबी का फैन हूं। आप सबों को आने वाले टूर्नामेंट के लिए शुभकामनाएं।" विराट ने छेत्री के साथ अपनी तस्वीर इंस्टाग्राम अकाउंट पर डाला। उन्होंने लिखा- बुधवार को आपके साथ खूब मजा आया कप्तान।

छेत्री ने रविवार को बेंगलुरु एफसी के लिए पहली बार इंडियन सुपर लीग का खिताब जीता। उनकी टीम ने एफसी गोवा को हराया। गोवा की फ्रैंचाइजी में कोहली का भी हिस्सा है। कोहली की टीम को 0-1 से हार का सामना करना पड़ा।

विराट की टीम अब तक आईपीएल खिताब नहीं जीत सकी है। टीम का पहला मुकाबला चेन्नई सुपरकिंग्स से 23 मार्च को चेन्नई के चेपक स्टेडियम में होगा। टीम में विराट को अलावा अनुभवी खिलाड़ी एबी डिविलियर्स, पार्थिव पटेल, युजवेंद्र चहल और उमेश यादव हैं।

गया के किसान सुरेश सिंह बताते हैं- रिकॉर्ड अपडेट ही नहीं है तो आवेदन खारिज होंगे ही। इसमें मोदी का क्या दोष। कसूर तो नीतीश का है। रिकॉर्ड अपडेट कराना तो राज्य का काम है। बहरहाल, इस वक्त राष्ट्रप्रेम के आगे सारे मुद्दे गायब दिखते हैं। लोग कहते हैं- पहली बार हमने पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मारा है। इंदिरा के बाद पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने ऐसी ताकत दिखाई है।

जमुई के लखन ठाकुर हों या गया की पटवा टोली के लोग..., सभी कहते हैं- इस बार दो ही खेमे हैं। एक तो खुद मोदी, दूसरे वे जो खिलाफ हैं। बता दें पटवा टोली बुनकरों का वह मोहल्ला है, जहां से सर्वाधिक संख्या में बच्चे आईआईटी क्लीयर करते हैं। कह सकते हैं यहां हर घर में एक इंजीनियर है।

समाजशास्त्री आरबी सिंह कहते हैं कि बिहार ऐसा राज्य है, जहां समस्याएं लाख हों, पर चुनाव जातियों के आधार पर ही लड़ा जाता है। यही यहां का राजनीति शास्त्र है। इसे समझाते हुए वे कहते हैं- देखिए चार में दो सीटें जमुई और गया सुरक्षित हैं। औरंगाबाद में तो 16 संसदीय चुनावों में 13 बार प्रतिनिधित्व दो परिवारों के बीच ही सिमटा रहा। यहां राजपूत ही जीतते रहे हैं।

आजादी के बाद हुए 16 चुनावों में 13 बार यह सीट सत्येन्द्र नारायण सिंह और रामनरेश सिंह के परिवारों के पास ही रही। इस बार भी दोनों के बेटों के बीच मुकाबला होगा। निखिल कुमार, सत्येन्द्र नारायण सिंह के पुत्र हैं तो सुशील कुमार सिंह, रामनरेश सिंह के पुत्र। वहीं परिसीमन के बाद सामान्य हुई नवादा सीट पर भूमिहारों की जीत का रिकॉर्ड है।

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